Palitana 5 — Chaityavandan In Hindi Full |top|

एह गिरि ऊपर आदिदेव, प्रभु प्रतिमा वंदो;रायण हेठे पादुका, पूजीने आनंदो।एह गिरि नी महिमा अनंत, कुण करे वखाण;चैत्री पूनमने दिने, तेह अधिको जाण।एह तीर्थ सेवों सदा, आणी भक्तिधार;श्री शत्रुंजय सुखदायको, दान विजय जयकार।

सर्व जिनालय सुंदर सोहे, शिखर श्वेत सुजाण।ध्वजा फड़के आकाशमां, महिमा अमित महान।।पांच चैत्यवंदन करी, कीधो आतम शुद्ध।'भवि' कहे मुक्ति पामीए, टाली कर्म विरुद्ध।।

- प्रथम चैत्यवंदन palitana 5 chaityavandan in hindi full

आदिेश्वर जिनरायनी, गणधर गुणवंत;प्रगट नाम पुंडरीक जस, महिमाए महंत।पांच कोडी मुनिंद साथ, अणसण तीहां कीध;शुक्ल ध्यान ध्याता अमल, केवल वर लीध।चैत्री पूनमने दिने ए, पाम्या पद महानंद;तेहना चरण कमले नमी, लहीए परमानंद।

यह सभी चैत्यवंदन का आधार है। पालीताना में पहले चैत्यवंदन के रूप में यह 'पंच परमेष्ठि' को समर्पित है। एह गिरि ऊपर आदिदेव

"श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे;भाव धरी ने जे चढे, तेने भव पार उतारे।"

(नोट: यह लेख जैन परंपरा के सामान्य ज्ञान एवं श्रद्धा के आधार पर लिखा गया है। विशिष्ट पाठ या क्रिया के लिए किसी साधु-साध्वी या विद्वान का मार्गदर्शन अवश्य लें।) प्रभु प्रतिमा वंदो

इस मंत्र के माध्यम से भक्त शत्रुंजय क्षेत्र की महिमा का गुणगान करते हैं और यहाँ सिद्ध हुए अनंत आत्माओं को नमन करते हैं।